दिल मेरा बेजार रहता,है हमें इंतजार रहता।
है तलब दीदार करने,
ये सुना उस पार रहता।
इस शहर में ख़ास ये है,
आम जन लाचार रहता।
आग नफरत की लगी है,
अब न दिल में प्यार रहता।
ढूंढता फिरता सुदामा,
किस गली में यार रहता।
इश्क या डूबा नशे में,
हर युवा बीमार रहता।
रैन"की आदत बुरी है,
मरने को तैयार रहता। रैना"
है तलब दीदार करने,
ये सुना उस पार रहता।
इस शहर में ख़ास ये है,
आम जन लाचार रहता।
आग नफरत की लगी है,
अब न दिल में प्यार रहता।
ढूंढता फिरता सुदामा,
किस गली में यार रहता।
इश्क या डूबा नशे में,
हर युवा बीमार रहता।
रैन"की आदत बुरी है,
मरने को तैयार रहता। रैना"
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