Sunday, October 25, 2015

नही कोई मेरा अपना बड़ी मुश्किल जमाने में,
लगे जीवन अधूरा है पड़े हम कैद खाने में।
मुझे हरदम यही डर है बुलावा भेज दे दिलबर,
करी मैंने बहुत देरी सनम से दिल लगाने में।
मिला जीवन जरा सोचो नया कुछ कर दिखाने को,
लगे रहते मगर हम तो खुदी को खुद मिटाने में।
कभी जो प्यार कर बैठा नही फुरसत मिले पल भर,
भली ये इश्क बीमारी मज़ा खुद को जलाने में।
यहां के लोग मतलब को करेंगे बात उल्फ़त की,
नही करते वफ़ा हमदम लगे रहते सताने में।
बहाना ढूंढते रहते मिले तो बात बन जाये,
इबादत कर तो ले लेकिन डरे दिल पास आने में।
मुझे मिलता नही साथी यकीं जिस पे हमारा हो,
सभी को झूठ से उल्फ़त लगे हैं सच छुपाने में।
कहे रैना"हमें दिल में तू आबाद कर लेना,
न हो तक़लीफ़ मुझे कोई सनम उस पार जाने में।


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