जिंदगी से अपना कोई वास्ता नही है ,
मंजिल तो है पर कोई रास्ता नही है,
करते हैं गिला खुद से तन्हा बैठ कर,
क्यों भला अपनी कोई दास्ता नही है। रैना"
मंजिल तो है पर कोई रास्ता नही है,
करते हैं गिला खुद से तन्हा बैठ कर,
क्यों भला अपनी कोई दास्ता नही है। रैना"
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