हादसों से डरा नही हूं,
इसलिये मैं मरा नही हूं।
सिर उंचा है रखा सदा ही,
पां किसी के पड़ा नही हूं।
याद औकात है मुझे तो,
हूं बुरा मैं खरा नही हूं।
लोग कहते बहुत बड़ा हैं,
बाप से मैं बड़ा नही हूं।
जो मिला है सबर उसी में,
बेवजह मैं अड़ा नही हूं।
जुल्म अब तो सहन न होगा,
जान ले मैं धरा नही हूं।
पैर में बैठ कर कटी है,
सिर किसी के चढ़ा नही हूं।
चैन मुझको मिले न रैना"
राह उसकी चला नही हूं। रैना"@@
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