पास हो कर दूर है क्यों सामने आता नही,
प्यास जन्मों की लगी क्यों दिखलाता नही।
हो चला वीरान गुलशन अब तू महकाता नही।
दर्द दिल में चैन पल भर भी नही मिलता मुझे,
इश्क की वो आग मन में क्यों तू भड़काता नही।
बेफिकर हम सो रहे तू गीत
छोड़ कर तुम चल दिये क्यों पास में आता नही।
प्यास जन्मों की लगी क्यों अब बुझाता नही।
प्यास जन्मों की लगी क्यों दिखलाता नही।
हो चला वीरान गुलशन अब तू महकाता नही।
दर्द दिल में चैन पल भर भी नही मिलता मुझे,
इश्क की वो आग मन में क्यों तू भड़काता नही।
बेफिकर हम सो रहे तू गीत
छोड़ कर तुम चल दिये क्यों पास में आता नही।
प्यास जन्मों की लगी क्यों अब बुझाता नही।
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