वैष्णो महारानी की जय जय जय
तेरे बच्चें मांगे माँ मेरी रहमत तेरी,
क्यों किसलिये कर रही इतनी देरी,
तेरे नाम का गुल जो खिले मन में,
फिर तो महकने लगे मिट्टी की ढ़ेरी। रैना"
तेरे बच्चें मांगे माँ मेरी रहमत तेरी,
क्यों किसलिये कर रही इतनी देरी,
तेरे नाम का गुल जो खिले मन में,
फिर तो महकने लगे मिट्टी की ढ़ेरी। रैना"
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