वक़्त तेजी से दौड़ता रहता,
पीछे निशांन छोड़ता रहता।
मस्ती में हरगिज न चलता,
दरियां के रुख मोड़ता रहता।
सब के आंसू निकाले रखता,
खून भी निचोड़ता रहता ।
वक़्त की खूब अदा ये देखो,
तोड़ता दिल जोड़ता रहता।
अक्सर करता है ख़रमस्ती,
पकड़ कलाई मरोड़ता रहता।
रैना"को भी वक़्त ने मारा,
बैठा छालें फोड़ता रहता। रैना"
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