Tuesday, March 31, 2015

aaj ka insan

दोस्तों फुरसत मिले तो जरूर पड़ना

 इंसान बहुत तंग है,लड़ रहा जंग है।
दुखी परेशान बड़ा, चौराहे पे है खड़ा,
मरने को तैयार है,पर मौत लाचार है।
जीवन चुनौती बड़ी,टूट रही कड़ी कड़ी।
समझ न आये खेल है,सारा प्लान फेल है,
बेबसी लाचारी है,घेरे बैठी बीमारी है।

बिक चूका सामान है, बंद होने वाली दुकान है।
किसी का न जिक्र है ,सब को अपना फ़िक्र है।
महंगाई की मार है,सारा बाजार बीमार है।

ऐसा न वैसा है ,सब को प्यारा पैसा है।
पैसे के लिए मारामारी है,पागल हुई दुनिया सारी है।
 ज्योतिषों की दीवाली रोज,डाक्टरों की है मौज।
मौज है नेता की, या मौज अभिनेता की।
रैना" न नेता है, न बन सका अभिनेता है।
दीवाना हो गया यार का,सूफी भूखा प्यार का। रैना"


No comments:

Post a Comment