खुद को ढूंढे भीड़ में गुम हो गये,
वो मेरे साथ हम फिर भी खो गये।
उस पार बहुत दूर अपना गांव है,
रात अन्धेरी पर तारों की छांव है।
रहीम का कोई दीवाना राम का,
वो उसका जो पीये जाम नाम का।
मस्जिद में देखा न मंदिर में देखा है,
देखने वालो ने मन के अंदर में देखा है। रैना"
वो मेरे साथ हम फिर भी खो गये।
उस पार बहुत दूर अपना गांव है,
रात अन्धेरी पर तारों की छांव है।
रहीम का कोई दीवाना राम का,
वो उसका जो पीये जाम नाम का।
मस्जिद में देखा न मंदिर में देखा है,
देखने वालो ने मन के अंदर में देखा है। रैना"
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