संडे स्पेशल दोस्तों के लिए
मैं तो बाढ़ का पानी रास्ता खुद बनाता हूं,
जो भी राह में मिलता उसको गले लगाता हूं।
हसरत है यही मेरी खुशबू बन बिखर जाऊ,
लफ्जों के फूलों को कलम से खिलाता हूं।
जब भी मिले फुरसत मुझे कोई भी पढ़ लेना,
खुली किताब हूं मैं तो कुछ भी न छुपाता हूं।
गिर गिर के संभला हूं सबक ये मैंने सीखा है,
दिखता जब कोई गिरता दौड़ के झट उठाता हूं।
सीखना फितरत है मेरी शिष्य मैं आज्ञाकारी हूं,
रैना"को जो भी आता है यारों को भी बताता हूं। रैना"
मैं तो बाढ़ का पानी रास्ता खुद बनाता हूं,
जो भी राह में मिलता उसको गले लगाता हूं।
हसरत है यही मेरी खुशबू बन बिखर जाऊ,
लफ्जों के फूलों को कलम से खिलाता हूं।
जब भी मिले फुरसत मुझे कोई भी पढ़ लेना,
खुली किताब हूं मैं तो कुछ भी न छुपाता हूं।
गिर गिर के संभला हूं सबक ये मैंने सीखा है,
दिखता जब कोई गिरता दौड़ के झट उठाता हूं।
सीखना फितरत है मेरी शिष्य मैं आज्ञाकारी हूं,
रैना"को जो भी आता है यारों को भी बताता हूं। रैना"
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