दिल थाम कर पढ़ना दोस्तों
टूटा सा ही घर लगता,
अंदर जा डर लगता।
पैसे के लिये सब भूले,
हर इक बेसबर लगता।
पांच साल में सब बदला,
गाँव मेरा नगर लगता।
बेनूर हो गया हर चेहरा,
उदास सारा शहर लगता।
बरबाद हो रही नई नस्ल,
बिक रहा है जहर लगता।
शाम ढली रैना"होने वाली,
खत्म हो रहा सफर लगता। रैना"
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