जब वो काली रात होगी,
फिर न कभी परबात होगी।
देख कर दुःख गम अंधेरा,
आँखों से बरसात होगी,
अफ़सोस उस घर जा के भी,
सजन से न मुलाकात होगी।
सवालों क्या जवाब देंगे,
सनम से जब बात होगी।
बेशक जब पी से मिलन हो,
रैना"ईद की वो शुभरात होगी। रैना"
फिर न कभी परबात होगी।
देख कर दुःख गम अंधेरा,
आँखों से बरसात होगी,
अफ़सोस उस घर जा के भी,
सजन से न मुलाकात होगी।
सवालों क्या जवाब देंगे,
सनम से जब बात होगी।
बेशक जब पी से मिलन हो,
रैना"ईद की वो शुभरात होगी। रैना"
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