एहसास तो होता है कोई दिल के दरवाजे पे दस्तक दे रहा,
अफ़सोस जब उठ कर देखता हूं तो कोई नजर नही आता। रैना"
अपनों से तकाजा करना भी न कभी,
बुझते शोलों को हवा दे आग भड़कायेगे। रैना"
सोचने से कुछ नही होने वाला,
निशाना लगाने के लिये तीर उठाना ही पड़ता है। रैना"
अफ़सोस जब उठ कर देखता हूं तो कोई नजर नही आता। रैना"
अपनों से तकाजा करना भी न कभी,
बुझते शोलों को हवा दे आग भड़कायेगे। रैना"
सोचने से कुछ नही होने वाला,
निशाना लगाने के लिये तीर उठाना ही पड़ता है। रैना"
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