मत पूछो हम कैसे है,
बिल्कुल आप के जैसे है,
हम जिंदगी से ऐसे निभाते है,
गम का तकिया लगा सो जाते है।रैना"
दोस्तों की फरमाइश पर खास पेशकश
वक़्त के सांचे में गर ढल गये होते,
मौसम के जैसे हम बदल गये होते,
जिस कदर सम्भले गये है दोस्त मेरे,
फिर तो ऐसे हम भी सम्भल गये होते,
बेशक इतना खुद पे भरोसा है मुझको,
हम खोटे सिक्के फिर भी चल गये होते।
अफ़सोस वक्त के सांचे में न ढल पाये,
मौसम के मानिन्द न हम बदल पाये।
कोई अरमान पूरा न हुआ तड़फते रहे,
अनजान राहों पे अक्सर भटकते रहे।
अब सोचते है रैना"जब वहां जायेगे,
अपने यार से नजरें कैसे मिलाये गे। रैना"
बिल्कुल आप के जैसे है,
हम जिंदगी से ऐसे निभाते है,
गम का तकिया लगा सो जाते है।रैना"
दोस्तों की फरमाइश पर खास पेशकश
वक़्त के सांचे में गर ढल गये होते,
मौसम के जैसे हम बदल गये होते,
जिस कदर सम्भले गये है दोस्त मेरे,
फिर तो ऐसे हम भी सम्भल गये होते,
बेशक इतना खुद पे भरोसा है मुझको,
हम खोटे सिक्के फिर भी चल गये होते।
अफ़सोस वक्त के सांचे में न ढल पाये,
मौसम के मानिन्द न हम बदल पाये।
कोई अरमान पूरा न हुआ तड़फते रहे,
अनजान राहों पे अक्सर भटकते रहे।
अब सोचते है रैना"जब वहां जायेगे,
अपने यार से नजरें कैसे मिलाये गे। रैना"
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