जिंदगी के सफर में बेखबर से रहते है,
जो अपना उसे तो अपना न कहते है,
दुश्मन से दिल लगा कर हम तो रैना"
बेवजह ही पहाड़ से दुःख दर्द सहते है।
जब होती मुलाकात जा के साजन से,
फिर आँखों से दरिया के से आंसू बहते है।
वर्ना पड़ेगा पछताना तू इतना सा काम करले,
नेक कर्म तू करके आगे का इन्तजाम करले।
वर्ना पड़ेगा पछताना -------------रैना"
जो अपना उसे तो अपना न कहते है,
दुश्मन से दिल लगा कर हम तो रैना"
बेवजह ही पहाड़ से दुःख दर्द सहते है।
जब होती मुलाकात जा के साजन से,
फिर आँखों से दरिया के से आंसू बहते है।
वर्ना पड़ेगा पछताना तू इतना सा काम करले,
नेक कर्म तू करके आगे का इन्तजाम करले।
वर्ना पड़ेगा पछताना -------------रैना"
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