इसमें सोचने समझने की जरूरत क्या है,
मोहब्बत में आखिर तन्हाई ही नसीब होती।
उल्फ़त की शमा जला के रखो,
खुद जलो उसको तड़फा के रखो,
इश्क में फना तो होना ही पड़ता,
दिल अपने को ये समझा के रखो। रैना"
मोहब्बत में आखिर तन्हाई ही नसीब होती।
उल्फ़त की शमा जला के रखो,
खुद जलो उसको तड़फा के रखो,
इश्क में फना तो होना ही पड़ता,
दिल अपने को ये समझा के रखो। रैना"
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