मुद्दत से बिछुड़े है इक बार फिर मिल जाये,
मेरे मन के मुरझाये वो फूल भी खिल जाये,
लगे जख्म जो सीने पर उनसे खून टपकता है,
तुम नजारे कर्म करदो वो जख्म भी सिल जाये। रैना"
खमोशी सबकुछ कहती दिल समझ भी लेता है,
कोई फिर भी न समझे तो ये गलती उसकी है।
एक दूसरे के गर अंदाज नही मिलते,
ऐसे लोगों से मत निभाना जिनसे मिजाज नही मिलते।
No comments:
Post a Comment