आदमी से आदमी मिलता जरूर है,
दिल में कोई फर्क तो रखता जरूर है।
सच साबित कर दे अब झूठ बोल कर,
आईने से हर कोई छुपता जरूर है।
दर्द को तो सीने में दबा के रखता है,
चेहरा यूं खिला खिला दिखता जरूर है।
आसमां में चाहे जितना ऊँचा उड़ लिया,
धरती पे वो एक दिन गिरता जरूर है।
याद रखना रैना जिंदगी की सच्चाई,
निकला सूरज शाम को ढलता जरूर है।रैना"
दिल में कोई फर्क तो रखता जरूर है।
सच साबित कर दे अब झूठ बोल कर,
आईने से हर कोई छुपता जरूर है।
दर्द को तो सीने में दबा के रखता है,
चेहरा यूं खिला खिला दिखता जरूर है।
आसमां में चाहे जितना ऊँचा उड़ लिया,
धरती पे वो एक दिन गिरता जरूर है।
याद रखना रैना जिंदगी की सच्चाई,
निकला सूरज शाम को ढलता जरूर है।रैना"
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