Friday, March 6, 2015

meri maa ke dware se

वैष्णों माँ के दर आकर जो मांगो वो ही मिल जाता,
झोलियां भर देती माता मन का फूल भी खिल जाता।

मेरी माँ मेरी माँ मेरी मेरी माँ,
सुन ले मेरी पुकार,विनती बारम्बार ,
गम ने आकर मुझको घेरा,
मुझको एक सहारा  तेरा,
कर दो मेरा उद्दार,अर्ज करो स्वीकार,
माँ मोरी मुझ पे करो उपकार  ----रैना"
सुप्रभात जी --------जय जय माँ

डगमग डोले नईया,

No comments:

Post a Comment