Sunday, May 31, 2015

दोस्तों आप को काफी कुछ पढ़ने को तंग किया है,
 अब कुछ दिन के लिए छुट्टी ये जरूर पढ़ लेना

आंसूओं को पीना सीख लिया हमने,
तेरे बगैर जीना सीख लिया हमने।
कुछ दिन दर्जी के पास गुजारे लिये,
टुकड़े दिल के सीना सीख लिया हमने।
डूब डूब कर तैरना भी आ गया हमको,
खेना कैसे सफ़ीना सीख लिया हमने।
पत्थरों को तराशना नही है मुश्किल,
पर तराशना नगीना सीख लिया हमने।
रैना"ने रो रो कर ही तमाम गुजारी है,
अब हंसने का करीना सीख लिया हमने। रैना" 
देखो भी मेरी माँ हमारा हाल क्या है,
सुनती नही बच्चों का सवाल क्या है।
बहुत परेशान दुखी खून के घूंट पी रहे,
बुरे हाल में मेरी माँ तेरे बच्चें जी रहे।
माँ तुम्हें खुशियों से मोहलत नही है,
तेरे  बच्चों को गमों से फुरसत नही है।
माँ तुम्हारे तक फरियाद आती नही है,
तभी तुम्हें बच्चों की याद आती नही है।
गर तुम चाहो मिल सकते नजारे माँ,
रैना"को करने सिर्फ दर्शन तुम्हारे माँ।  रैना"
सुप्रभात जी -------------जय जय माँ

हर गम सीने में छुपा लिया हमने,
रिश्ता अब दर्द से बना लिया हमने,

भटक रहे इक मुद्दत से कोई ठिकाना न मिला,
तेरी इबादत करने का भी कोई बहाना न मिला,
मेरे मालिक तेरी इस दुनिया का अजब दस्तूर है,
पेट भरे को खिलाते पर भूखे को खाना न मिला। रैना" 

तूफान भी तुम्हारा रास्ता रोक न पायेगे,
तुम चलो तो सही रास्ते खुद बन जायेगे।
जोश और होश से जरा काम लीजिये गा,
युवा ही देश का नया इतिहास बनायेगे। रैना"

हमें देख कर अब दिन रात कुत्ते भौंकते है,
हम किराये का मकान छोड़ने की सोचते है,
जमाने की बातें सुन तुम घबरा गये रैना"
आशिक इश्क की भठ्ठी में जान झौंकते है।रैना" 
हो तेरी रहमत कुछ अलग कर जायेगे,
गर तुम न चाहोगे फिर तो मर जायेगे।
शाम ढलेगी जब स्याह काली रात होगी,
साथ न हुये जो तुम रैना" डर जायेगे। रैना"
यूं आंख से आंख लड़ती जाये,
खुमारी-ए-इश्क चढ़ती जाये,
पास होकर भी क्यों दूर हो तुम,
मिलने की तलब बढ़ती जाये। रैना"
हम मतलब के लिए किसी के साथ ताल्लुक नही बढ़ाते ,
लेकिन कुछ लोगों के अन्दाज मन को भा जाते है। रैना"


तुझको पाने की चाह ने सताया मुझको,
अक्सर शमा के जैसे ही जलाया मुझको,
एहसास होता तुम मेरे दिल में रहते हो,
लेकिन तूने हसीं चेहरा न दिखाया मुझको। रैना"


Saturday, May 30, 2015

दोस्तों संडे स्पेशल
जितने ज्यादा भटकोगे,
उतने ज्यादा अटकोगे।
जितने ज्यादा चमकोगे,
उतने ज्यादा खटकोगे।
कुछ हासिल नही होगा,
बेवजह पैर ही पटकोगे।
इश्क मिजाजी दुःख देता,
फ़क़त सूली पे लटकोगे।
ये बुत कभी खुश न होते,
तुम और कितना मटकोगे।
रैना"दुखों का घर दुनिया,
तुम शीशे जैसे चटकोगे।   रैना"

तुम सा कोई हमसफ़र नही मिलता,
तेरे घर जैसा कोई घर नही मिलता,
बैठ ले दो घड़ी जिसकी छाया के नीचे,
अफ़सोस कोई ऐसा शज़र नही मिलता। रैना"
 तू माँ है अपने बच्चों से क्यों दूर है बैठी,
दूर है बैठी क्यों दूर है बैठी,
तू माँ है अपने बच्चों की --------
बच्चें तेरे गुमनाम हुए तू मशहूर है बैठी।
तू माँ है अपने बच्चों से -----------
ध्यानु ने बुलाया माँ तू दौड़ी चली आई,
मेरी बारी इतनी क्यों देर लगाई,
रूठ गई माँ हमसे क्यों मजबूर है बैठी।
तू माँ है अपने बच्चों से --------रैना"
सुप्रभात जी -------------जय जय माँ



नाम की शराब बड़ी ही सस्ती है,
पी के देखी तो मस्ती ही मस्ती है,
भूल गये हम खुद अपने आप को,
सारी दुनिया घर अपनी बस्ती है। रैना"
तू मेरे वजूद में उतर न पायेगा,
मैं टूटा आइना तू सवंर न पायेगा।

इतना आसान नही किसी के वजूद में नजर आना,
शमा खुद को जलाती तभी गले लगता है परवाना।

बेहतर होगा तू बदली अपनी आदत कर ले,
उल्फ़त तेरा मिजाज नही सियासत कर ले।
दीवानों की होती है अपनी अलग दुनिया,
जहां जी चाह यार से गुफ्तगू इबादत कर ले।
हुस्न-ए-यार पे फ़िदा हो दिल कुर्बान कर दे,
दिल को करार मिले पाक मोहब्बत कर ले।
दोस्त का ख्याल नही दुश्मनों की चिन्ता,
वहां परेशां होगा जमा नाम की दौलत कर ले।
आशिकों की महफ़िल का यही दस्तूर रैना"
हरपल जामे नाम पीने की हिमाकत कर ले।  रैना" 
मैं तो आइना हूं सच कहना आदत है मेरी,
नखरें सहना फ़क़त टूटना किस्मत है मेरी,
कैसे झूठ बोल दू चश्मदीद गवाह जो हुआ,
मुंहु पे साफ साफ बोलना फितरत है मेरी।रैना" 

अफ़सोस मुलाकात अधूरी रह गई,
कश्मकश में वो बात अधूरी रह गई,
उनकी बदनामी के डर से न छलकी,
आंसूओं की बरसात अधूरी रह गई। रैना"
निसंदेह ये सियासतदानों का दौर है,
अब नेता के हाथ में ही सबकी डोर है।
कार्यालयों में उसकी ही तूती बोलती,
चम्मचा चुगल बेईमान जो कामचोर है।
रिश्वत लेंने वाला रिश्वत दे कर छूटता,
अब यहां चोरों पे अक्सर पड़ता चोर है। 
जिसके हाथ में पैसा भैंस उसी की है,
बुरी गत उसकी जो गरीब कमजोर है।
चन्द्रमा का क्या रोज बिस्तर बदलता,
अपने हाल से दुखी बैठी रोती चकौर है।
रैना"अब दिन में कई रंग है बदलता,
प्रेम प्यार की बातें सिर्फ झूठा शौर है।  रैना"

Friday, May 29, 2015



दोस्तों यदि फुर्सत हो तो जरूर पढ़ लेना 

तेरे घर का पता मिलता ही नही, हम भटक रहे परेशान बहुत,
किस बस्ती में तेरा ठिकाना है,इस शहर से हम अनजान बहुत। 
तेरे घर का पता -----------
कोई कहता मस्जिद में बैठा,कोई कहता बैठा मन्दिर में,
कोई कहता आसमान पे रहता,कोई कहता रहता समुंदर में,
तेरे चाहने वाले अब जाये कहाँ,ढोंगी करते हैं हैरान बहुत। 
तेरे घर का पता ------------
धर्म का कोई भी कर्म नही,सीधी सादी ठेकेदारी है,
सब अपना ही पेट पीट रहे,यहां हर कोई व्यापारी है,
याद कर लो ज्ञान की दो बातें,फिर चलती धर्म की दुकान बहुत। 
तेरे घर का पता --------------
देना प्यासे को घूंट पानी नही,साल में इक दिन छबील लगा देना,
खूब मंच सजा दिखाने को,राहगीरों को जबरदस्ती शर्बत पिला देना,
अब धर्म के ठेकेदार अख़बारों में करते हैं अपना गुणगान बहुत। 
तेरे घर का पता ---------------रैना"

सुन वैष्णो रानी मेरी माँ तेरा ही सहारा चाहिये,
मेरी माँ तेरा ही सहारा चाहिये माँ तेरा ही------------
मझदार कश्ती हम परेशां माँ जी किनारा चाहिये। 
मेरी माँ तेरा ही सहारा चाहिये माँ तेरा ही -------------
हम तेरे बच्चे है माँ हम पे कर्म कर,
आसान हो जाये जीवन का सफर,
पतझड़ में ही काट ले गे माँ हमें न नजारा चाहिये
मेरी माँ तेरा ही सहारा चाहिये माँ तेरा ही ----------
तेरी कृपा माँ दुनिया मस्ती में खो गई,
मेरी बारी आई तो बत्ती गुल हो गई,
फरियाद  ये  विनती मेरी माँ प्यार तुम्हारा चाहिये।
मेरी माँ तेरा ही सहारा चाहिये माँ तेरा ही ----रैना"
सुप्रभात जी -------------------जय जय माँ

  

मैं इस काबिल नही जो तारीफ़ हो मेरी,
राह के पत्थर सिर्फ ठोकरों के लिये होते हैं। रैना"
                    मां 
जैसे शमा खुद को जला के बज्म को रोशन करे,
वैसे ही माँ खुद को तपाये गम सहे तिल तिल मरे।
घर को रोशन करे। …। …… रैना"

मैं इस काबिल नही जो तारीफ़ हो मेरी,
राह के पत्थर सिर्फ ठोकरों के लिये होते हैं। रैना"

हम भी चमके सितारे होते,
गर किस्मत के न मारे होते। रैना"

आंखो में तो इक जहान सा सजा रखा है,
दिल में फड़कता तूफ़ान सा दबा रखा है,
अब मुझको ज्यादा चिन्ता फ़िक्र नही है,
क्योंकि ये घर तो उसका घर बना रखा है। रैना"


मिट्टी सोने की खद्दान से उठाई होगी,
ये मूरत तो खुदा ने खुद बनाई होगी।
घटाओं से मांगी होगी काली जुल्फें,
मस्ती आ कर आंखों में समाई होगी।
रंग भरा होगा इत्मीनान से बहारों ने,
नजारों ने फिर ये तस्वीर सजाई होगी।
सुर्खी सफेद माटी से खूब तैयार कर के,
फिर पाक रूह इस घर में बसाई होगी।
अंग अंग में मस्ती जान लेने वाली अदा,
देख कामनी भी घबराई शरमाई होगी।
काबिले तारीफ़ रैना" सूरत औ सीरत,
चमत्कार उसका हैरान ये खुदाई होगी। रैना"



छोड़ दुनिया की दीवानगी बन्दगी कर ले,
वरना पछतायेगा सुर्खरू जिन्दगी कर ले,
इश्क मिजाजी में फ़क़त तड़फन हासिल,
मन को चैन मिले उससे आशिकी कर ले।रैना"
फ़क़त =सिर्फ



मन को सकून मिला तुझ से मिलकर,
खिजा का फूल खिला तुझ से मिलकर,
तुम मिले तो सब कुछ पा लिया हमने,
न किस्मत से गिला तुझ से मिल कर। रैना"

मेहनत ने तो रास्ता दिखाया मुझको,
लेकिन किस्मत ने तो रुलाया मुझको,,
तेरी हिम्मत का इम्तहान हो रहा रैना"
मेरी माँ ने हर बार ये समझाया मुझको। रैना"


Thursday, May 28, 2015




बुझते शोलों को हवा न दो,
मुझको जीने की दुआ न दो।
लाइलाज हुई बीमारी मेरी,
ये बेहतर होगा दवा न दो।
कुछ तो होगे हमदर्द मेरे,
उनको तो मेरा पता न दो।
दौड़ते रहते बेजा हरपल,
यूं खुद को इतनी सजा न दो।
दिल के करीब जो रखते हो
चाहने वालो को  दगा न दो।
रैना"की हस्ती मिटे तो अच्छा,
कजा दे दो उसको वफ़ा न दो। रैना"



माँ सुन ले पुकार अब मेरी,
हाँ मेरा दिल टूट गया,
क्यों न मुझ पे कृपा तेरी,
हाँ मेरा दिल टूट गया।
माँ सुन ले पुकार ---------
अपने तो हरदम नेक इरादे है,
फिर भी बंद हुये सारे दरवाजे है,
माँ तूने भी कर दी है देरी,
हाँ मेरी दिल टूट गया।
माँ सुन ले पुकार --------
तेरे चरणों से माँ मुझे सच्चा प्यार है,
मेरी विनती क्यों न तुझे स्वीकार है,
मेरी जान गमों ने घेरी,
हाँ मेरा दिल टूट गया।
माँ सुन ले पुकार --------
मांगते बच्चे वैष्णो रानी माँ प्यार दे,
रैना"की बिगड़ी माँ जिंदगी सवंर दे,
मर जायेगे जो आँख तूने फेरी,
हाँ दिल मेरा टूट गया।
माँ सुन ले पुकार -----------रैना"
सुप्रभात जी ---------जय जय माँ

रंग बदलने में माहिर पाला बदलने की आदत है,
जितना मतलब होता उतनी ही करता मोहब्बत है,
इंसान की ये मजबूरी किसी की खता कसूर नही,
मौसम ही कुछ ऐसा इन्सान ने बदली फितरत है। रैना"
 भटका हुआ मुसाफिर मैं मंजिल मिलना मुश्किल है,
`टूटी कश्ती घबराया पतवार बहुत ही दूर साहिल है,
साथ मेरे रहता फिर भी बात मुलाकात नही करता,
दुःख यही अफ़सोस मुझे यार मेरा बड़ा संगदिल है। रैना"

है इन्तजार उसको हम भी तैयार बैठे हैं,
न उसकी मिली मंजूरी तभी लाचार बैठे हैं। रैना"

तुझसे मिलने को बहुत से बीमार बैठे है।
मिलती हमें जो फुरसत कर लेते चार बातें,
तेरे कूचे में यारा तेरे बीमार बैठे है ,



पाठ इश्क का हम पढ़ने लगे है,
उसको भूल उसे याद करने लगे है,
रैना"क्यों रहे हम उससे दूर  

Wednesday, May 27, 2015

जिस पे विश्वास करे वो उपहास करे,
अब जीवन के लिये क्या खास करे।
अब जीवन के --------------------
उझड़ी दिल की बस्ती हिलती हुई दीवारें है,
उखड़े हुए प्लास्टर भवन में आई हुई दरारें हैं,
गम के तेज आंधी ने जुल्म कहर गुजारे हैं,
दूर दूर तक भी नज़र आते न अपने प्यारे हैं,
महफ़िल में भी वीराना तन्हाई के सहारे हैं,
किसी का ये दोष नही हम किस्मत के मारे हैं,
अब भी दोस्त कहते हैं मन को न उदास करे।
अब जीवन के --------------------
 मन के घने जंगल से आती डरावनी आवाजे हैं,
खुद को बचाने लिये मन इधर उधर ही भागे है,
मातम सा छाया निरंतर गमगीन धुन बाजे है,
पर कटे गिरे नीचे यूं अरमानों की ऊँची परवाजें है,
तथ्य जो एकत्रित किये सामने आये जो आगे है,
उससे ये साफ स्पष्ट हुआ अपनों ने गोले दागे है।
उनसे अभी निपटे नही दुश्मन और भी जागे है,
रैना"उसने ही पाया जिसने मोह माया काम त्यागे है,
जीवन नईया डूब गई हम  महसूस एहसास करे।
अब जीवन के लिये क्या खास करे। ---------------रैना"






माँ बाप की सेवा में जो भी अपना ध्यान लगाते हैं,
मुक्त्त हो जाये बंधनों से जीवन भर वो सुख पाते हैं,
रैना" ये सच जान ले इन्सान में भगवान वास करे, 
किसी आम की बात नही यही चारो ग्रन्थ बताते हैं। रैना"

अर्श से टूट के गिरते तारें ये हमको समझाते हैं,
सम्भल के रहना जिंदगी में बुरे दिन भी आते हैं,
शौख से खिलते गुल जो गुलशन को महकते हैं,
वक़्त की जब मार पड़े वो गुल मुरझा जाते हैं,
टूटे पत्ते बिखरे जमीं पर अपना दुःख फरमाते हैं,
आंधियों से टकराने वाले हवा की ठोकरें खाते हैं। 
मिट्टी कहती मिट्टी से तू काये का गुमान करे,
तेरा मेरा रिश्ता सच्चा बाकी झूठे रिश्ते नाते हैं। 
रैना"इतना जान ले तू जब फ़रिश्तें लेने आते हैं,
बांधे रस्सी से किसी को वो पलकी पर बैठाते हैं। रैना"

ये कोई अर्जीनवीश होगा?????
 जो बात पलट गया?????
ऊपर वाला ऐसी गल्ती कभी नही करता।


बेवजह हंसा नही करते,
किसी की नजर लग गई तो,
भटकोगी बाबेयों के चक्कर में। रैना"
दोस्तों ज़रा पढ़ के देखना
खूब कर लो मेहनत मंजिल से दूरी रह जाये,
किस्तम के बिना मेहनत भी अधूरी रह जाये।
इक सपना पूरा करने में सारी उम्र गुजार दी,
टूट जाये सपना जब उसकी मंजूरी रह जाये।
हकीकत में जो काम न कोई करे जमीन पर,
उसकी तो सिर्फ कागजों में मशहूरी रह जाये।
ख़ुशी से कोई वास्ता न रहा इस मौजूदा दौर में,
इन्सान के हिस्से में फ़क़त मजबूरी रह जाये।
सब भूल जाये इन्सान तू आया है किसलिये,
मोह माया में उलझ कर बात जरूरी रह जाये।
मेहनत में कोई कमी नही मुकद्दर की बात है,
रैना"डूबती कश्ती देख के रोती नूरी रह जाये। रैना"

Monday, May 25, 2015

रोना अन्दाज हमारा नही,
हंसी दुनिया को गवारा नही।
खड़े हो जाओ अपने पैरों पे,
कोई किसी का सहारा नही।
सिर्फ दौलत से रिश्तेदारी है,
कोई किसी को प्यारा नही।
एक आधा हो किस्मत वाला,
जिसको अपनों ने मारा नही।
कुछ आगे की फ़िक्र करना,
मिलेगा जीवन दोबारा नही।
जीवन भर फिर दुखी रहना,
माँ बाप का कर्ज उतारा नही।
तजुरब्बा ये सूफी रैना"का,
बिन मेहनत चमके सितारा नही।  रैना"




माँ वैष्णो रानी मेरी सुन ले पुकार,
माँ तेरे ही सहारे की है मुझे दरकार।
माँ वैष्णो रानी तेरी जय जयकार।
माँ वैष्णो रानी -------------------
तेरे चरणों से माँ मुझको उल्फ़त,
और कोई न तमन्ना मेरी हसरत ,
इक बार माँ तेरे करने दीदार।
माँ वैष्णो रानी तेरी जय जयकार।
माँ वैष्णो रानी ----------------
पूर्ण होती कोई आस नही है,
माँ खुद पे भी विश्वास नही है,
न किसी पे भरोसा माँ तेरा एतबार।
माँ वैष्णो रानी तेरी जय जयकार।
माँ वैष्णो रानी------------रैना"
सुप्रभात जी -------------जय जय माँ

वो मेरे कूचे से गुजर के देखेगे,
हम भी छत से उतर के देखेगे।
गर हुई नजरे इनायत उनकी,
थोड़ा हम भी संवर के देखेगे।
इश्क करना तो मौत को दावत,
गर वो चाहें तो मर के देखेगे।
गर मुझे मेरी नज़र से देखेगे,
फिर हम नज़र भर के देखेगे।
रैना" गर उसने तोड़ा दिल मेरा,
ख़ुदक़शी हम भी कर के देखेगे। रैना"

बुरा न मानो चोरों की शान में कहा है

दूसरे का नाम काट कर अपना नाम भरने वाले,
फेसबुक पे चोर बहुत कविता चोरी करने वाले।
कविता सिर्फ एक लिखने वाले बेहिसाब हो गये,
चकित भ्रमित हो रहे बेचारे कविता पढ़ने वाले।
कलम के पुजारी कवि को कम ही लोग बुलाते,
अधिकतर कविता चोर होते मंचों पे चढ़ने वाले।
यहां से कुछ वहां से उठा कुछ कवि जोड़ते तुक्के,
चम्मचे ऐसे भी बहुत कवि शिरोमणि बनने वाले।
सूफी रैना"श्राप देता कविता चोरी करने वालो को,
अगले जन्म हिजड़े बनेगे भाग्य नही सवारने वाले। रैना"
  

यार को चाहने वालो के अंदाज निराले होते हैं,
दीवानों के हाथों में जामे नाम प्याले होते हैं।
आशिक मस्त अदाओं पे दिलो जान लुटा देते,
मथुरा मक्का कांशी ओ मन में शिवाले होते है।
महबूब पे दिल फ़िदा हुआ अब करनी इबादत है,
हमने गोरों से क्या लेना मस्त प्यारे काले होते है।
इश्क की मुश्किल राहें तो जान ही निकाल लेती,
होठों पे पड़ते फ़फ़ोले हैं और पैरों में छाले होते हैं।
सब कुछ लुटा देते फिर भी करते न गिला कोई,
यार की रजा में राजी दीवाने तो मतवाले होते हैं।
देखे न महल किसी के अपनी झोपड़ी में मस्ती,
तन के चाहे वो हो काले पर मन में उजाले होते हैं।
अब लोग दीवाने पैसे के उल्फ़त से है दूर बहुत,
जो चुप रहे वो फेल हुये पास भौंकने वाले होते है।
मौलवी पादरी पुजारी और खद्दरदारी में फर्क नही,
नेता देश को लूटे धार्मिक संस्थानों में घोटाले होते है।
खेत का बचना मुश्किल जब बाड़ खेत को खाने लगे,
अब देश की बुरी हालत रैना"गद्दार रखवाले होते है।रैना" 


बेशक बदले में वो कुछ लेता नही है,
लेकिन जो हम चाहते वो देता नही है। रैना"

Sunday, May 24, 2015

 ये दर है माँ वैष्णो रानी का,यहां खुशियां मिलती तमाम है,
करे रहमत शौहरत मिल जाये और मन को मिलता आराम है।
सच्चा दर है वैष्णो रानी का -----------------------------
महारानी की अति मशहूरी है,
फ़क़त श्रदा प्रेम जरूरी है,
कोई रहती न मांग अधूरी है,
बिन मांगे हो जाती पूरी है,
जो माँ का भक्त प्यारा है उसे भक्ति का मिलता इनाम है।
सच्चा दर है वैष्णो रानी का --------------------
क्या खूब दरबार सजाया है,
बीच गुफा के डेरा लगाया है,
जो श्रदा से दर पे आया है,
उसने जीवन महकाया है,
कट जाते बन्धन जन्मों के जो पीता नाम का जाम है।
सच्चा दर माँ वैष्णो रानी का -------------------
मिली मोहलत दर पे आ रैना",
माँ को अपना दर्द सुना रैना",
माँ के चरणों से लग जा रैना",
लिख भजन माँ के गा रैना",
छोड़ झंझट सारे झमेलों को खत्म होता न ये काम है।
सच्चा दर माँ वैष्णो रानी का --------------रैना"
सुप्रभात जी ---------------जय जय माँ




मेरे साथ साथ तुम्हारा साया है आज भी,
नंदू दिल से जुदा न कर पाया है आज भी।
इक मुद्दत गुजर चुकी तुझ से जुदा हुये,
फिर भी उंगली पकड़ घुमाया है आज भी। 
मेरी रगों में दौड़ता ये तुम्हारा ही खून है,
अपनेपन का एहसास कराया है आज भी।
सुबह मैं तो सो रहा था बड़ी गहरी नींद में,
नंदू कह कर आप ने जगाया है आज भी।
हो सके तो वापिस आओ वो जहान छोड़ के,
जोशी ने दिल से आप को बुलाया है आज भी। जोशी "

दोस्तों मेरी ये रचना भारत माता को समर्पित है
आप भारत माँ के प्यारे हैं इक बार पढ़ना जरूर

गौर करो कुछ इक दूजे पे न कीचड़ उछालिये,
देश का भला कैसे हो मिल बैठ हल निकालिये।
किस्मत आप की मेहरबानी तो जनता की भी है,
मसीहा हैं आप भारत माँ की इज्जत संभालिये।
एकता में बल मेरा भारत देश बने अति महान,
जनता को धर्म जात क्षेत्र के चक्कर में न डालिये।
सब की मंजिल एक फ़क़त हैं रास्ते जुदा जरूर,
बेशक हम सब एक दिलों में न यूं नफरत पालिये।
इन्सान क्या गल्ती तो भगवान से भी हो जाती है,
पर भूल कर भी अपनी गल्ती न किसी पे डालिये।
बेटी न मारो कोख में पढ़ाओ लिखाओ जो बने शान,
बेटियों का फर्ज भाई बाप की पगड़ी न उछालिये।
रैना"याद रखना बड़ा मुश्किल माँ बाप का किरदार,
बुजुर्ग अपनी इज्जत मान आदर प्रेम से संभालिये। रैना"

मैं काली रैना सुबह का इन्तजार है,मेरा नसीब अँधेरे से मुझको प्यार है।
टूटे सितारें रात भर रोते हैं साथ में,
अपने घर में न कभी आनी बहार है।
अपना सफीना साहिल पे ही डूबता,
बाखूबी मझदार को कर लेता पार है।
ख़ुशी ने अब मेरा दामन छोड़ दिया,
गम मेरी जिन्दगी में हुआ सुमार है।
धोखा तो हमें देखिये किस्मत दे रही,
धोखेबाज वैसे न कोई मेरा यार है।
दीदारे यार की तलब चाहत है बहुत,
होगा सवेरा रैना"को यकीं एतबार है। रैना"

दोस्तों सुनो संडे स्पेशल

मैं जब अपने अन्दर देखता हूं,
काला गहरा समुंदर देखता हूं।
अपनी हरकतों के बारे सोचता,
मैं जब भी कोई बन्दर देखता हूं।
दिल के अजीब मिजाज तो देखो,
 बिन मेहनत के नम्बर देखता हूं।
जब से महंगाई ने जोर पकड़ा है,
दिन में मुफ्त के लंगर देखता हूं।
चेहरे पर तो खिली मुस्कान देखू,
दोस्तों के हाथ में खंजर देखता हूं।
जमीं पे रहने वाले तो सभी बदले,
जमीन न बदला अंबर देखता हूं।
पैदा हुये बहुत नकल करने वाले,
बने फिरते स्वंभू पैगंबर देखता हूं।
रैना"तोड़ दे जो किस्मत का ताला,
मैं ऐसा करिश्माई हैम्बर देखता हूं। रैना"




Saturday, May 23, 2015

दोस्तों के सोचने समझने के लिए

रोते को चुप करा देना ,गिरते को उठा देना,
भटके को राह दिखा देना,मन के अंदर दीप जला देना,
भूखे को खाना खिला देना,
यही तो पूजा इबादत है,
ऐसे इन्सां से उसको मोहब्बत है।
कहीं एक जगह वो बैठा नही,किसी कमरे में वो रहता नही,
यहां कोई भी न सच पुजारी है,अब धर्म की ठेकेदारी है,
ऐसा है न कुछ वैसा है,सब का मकसद सिर्फ पैसा है,
फिर पैसे की होती चोरी है,क्योकि पैसा सब की कमजोरी है,
कमजोरी का फायदा उठाते है,धर्म के नाम पे बहकाते हैं,
बहके लोगों से फिर क्या कहना,इन्होने तो सदा दुखी ही रहना,
अब झूठी सब की शौहरत है।
ऐसे इन्सां से उसे न मोहब्बत है। रैना"





मेरी मुश्किल करो आसान वैष्णो रानी माँ,
मैं तो दुखी बहुत परेशान वैष्णो रानी माँ।
तेरे चरणों में रहे ध्यान  वैष्णो रानी माँ,
मेरा हो जाये कल्याण वैष्णो रानी माँ
वैष्णो रानी माँ ------------------
ध्यान लगे मन कभी न डोले,
जीभा हरपल जय जय माँ बोले,
तेरी कृपा से मेरी शान वैष्णो रानी माँ ,
मेरी मुश्किल करो आसान वैष्णो रानी माँ।
वैष्णो रानी माँ ----------------रैना"
सुप्रभात जी ---------जय जय माँ


हम तस्वीर बदल सकते हैं,
लिखी तहरीर बदल सकते हैं,
रैना"कड़ी मेहनत के बल से,
हम तकदीर बदल सकते हैं। रैना" 
पढ़ते लोग मुझे मुस्कराते है,
कुछ ऐसे भी जो आंसू बहाते हैं,
पर मेरा दर्द कोई भी न जाने,
जो हकीम वो ही पहचाने। रैना"

मुझे भरोसा है अब नही तो????
मेरे बाद लोग पढ़ेंगे मुझको। रैना"
टूटा मेरा दिल बिखरना बाकी है,
जिस्म से जान निकलना बाकी है।
सामां तो कब का ही बांध लिया है,
अपने घर की तरफ चलना बाकी है।
दिल पे लगे जख्म नासूर बन गये,
दर्द के मारो का तड़फ़ना बाकी है।
 अश्कों का दरिया बहने लगे पल में,
गमगीन आंखों का छलकना बाकी है।
हो जानी है स्याह काली काली रैना",
निकला सूरज अभी ढलना बाकी है। रैना"
हमने नसीब कुछ ऐसा पाया है,
कश्ती  डूब जाये साहिल पे आकर। रैना"
नाम तेरा लेकर जीना है मुझको,
जामे उल्फ़त ही पीना है मुझको।

नाम तेरा लेकर जीना है मुझको,
पनाह में तेरी ही रहना है मुझको

भूल जायेगे हर इक गुजरे पल को,
याद रखेगे सिर्फ आने वाले कल को।

सिर्फ इक तू मेरा सपना है,
आंखों में सज़ा के रखना है।

उनके वक़्त की कीमत है बेजा मुलाकात नही करते,
समझ आ गई बड़े लोग तो छोटे से बात नही करते। रैना"


अब छोड़ भी दो कोई कोना खाली,
सारे शहर को महका के रख छोड़ा। रैना"

पेट भरने को हर कोई काम ढूंढे,
मीरा दीवानी अपना श्याम ढूंढे।
मयकश की चाहत की हद देखो,
हर महफ़िल में सिर्फ जाम ढूंढे।
तेरे आशिक दीवाने भी काम नही,
कोई रहीम ढूंढे तो कोई राम ढूंढे।
मेहनतकश मस्त लगे मस्ती में,
कामचोर ही अक्सर इनाम ढूंढे।
रैना"फिर बन गया छोटा बच्चा,
माँ तेरी गोदी सा फिर आराम ढूंढे। रैना"

Friday, May 22, 2015

दोस्तों आप के लिए खास पेशकश

सुरमयी आंखों को तेरा इंतजार बहुत,
मैं पुजारन को देवता से है प्यार बहुत।
तारें गिनते रहते पल भर भी नही सोते,
फ़क़त तेरी तलब दिल है बेकरार बहुत।
अन्धेरी रात में हाथ नही पकड़ता कोई,
 देख चांदनी बन जाते ग़मगुसार बहुत।
इस बस्ती में रहते तन धन के भूखे,
राहे उल्फ़त में मिल जाते गद्दार बहुत।
रैना"वीर कम हैं लेकिन जमीं नही खाली,
अब भी हैं खुद्दार वफ़ादार दिलदार बहुत। रैना"

बहुत सम्भाला दिल को लेकिन,
 तेरी जुल्फों में उलझ कर रह गया। रैना"
सुरमयी आंखों को पर्दे में रखो,
नही तो शहर शराबी हो जायेगा। रैना"

सियासतदानों की फितरत देखिये,
चुनाव जितने के बाद चींटी के पर निकल आते है। रैना"
बच्चों की अर्ज कर स्वीकार मेरी माँ,
एक बार करने है तेरे दीदार मेरी माँ,
तुझको तो कुछ भी न फर्क पड़ेगा,
पापी हो जायेगे भव पार मेरी माँ।
एक बार करने है तेरे ---------------
कहने को उजाला फैला बहुत अँधेरा है,
दूर दूर तक न नजर आता सवेरा है,
पथ भ्रष्ट हो गया सारा संसार मेरी माँ।
एक बार करने है तेरे -------------
अपने बच्चों पे इतना कर्म कमा जा माँ,
शेर पे सवार हो गुफा से बाहर आ जा माँ ,
रैना"को फ़क़त तेरा इन्तजार मेरी माँ।
एक बार करने है ---------------रैना"
सुप्रभात जी ---------------जय जय माँ

हमने तो तसल्ली कर ली थी,
पर दिल जुल्फों में अटक कर रहा गया। रैना"
खत्म तब मेरा इन्तजार होगा,
सनम जब तेरा दीदार होगा।
हम जो तेरी हर अदा पे मरते है,
बेशक तुझको हमसे प्यार होगा।रैना"

          


रुख पे बिखरी जुल्फें यूं कहर ढा रही है,
बदली में छुपे चाँद की याद दिला रही है।
तिरछी तेरी नजरों से है मय छलकती,
ये देख मयकशों पे मस्ती सी छा रही है।
सारा शहर अदाओं ने दीवाना बना दिया,
सम्भालने में उनको दिक्कत आ रही है।
हीर सोहनी कोई तुझको लैला बता रहा, 
तू हर दिल में इश्क का दर्द जगा रही है।
लगे न तुझे किसी दिल जले की नज़र,
रैना"को यही फ़िकर चिन्ता खा रही है। रैना"

ये भी सच किसी का घर भी टूटा है,
तेरी इस अदा ने लाखों को लूटा है।
मुखड़े पे बिखरी ये जुल्फे देख कर,


लबों पे फ़साना पहले ही था,
लेकिन सुनने वाला नही मिल रहा था। रैना"
रीनू जी मेरी तरफ से तोहफा है आप के लिए
मेरी जिंदगी में शामिल हो जा,
मैं तेरे तू मेरे काबिल हो जा।
मैं डूब जाऊ तेरी आंखों में,
तू मेरे इश्क में पागल हो जा।
गहरी नदिया को पार करना,
मैं कश्ती तू साहिल हो जा।
गर चैन से जीना दुनिया में,
बेहतर है तू कामिल हो जा।
पैसा कमाना नही मुश्किल,
छोड़ मोहब्बत जाहिल हो जा।
 मैं मुसाफिर तू मंजिल मेरी,
कर कर्म रीनू"को हासिल हो जा। रीनू"

सांसे गिनते जीना छोड़ दिया,
दोस्तों ने दिल मेरा तोड़ दिया।
खूब गुजर रही थी मस्ती में,
मेरा रिश्ता गम से जोड़ दिया।
दावा करते थे मरेगे तेरे खातिर,
मौका लगते ही खूं निचोड़ दिया।
करना था गुले गुलजार गुलशन,
हादसे ने रुख मेरा मोड़ दिया।
आगे निकल जाने की हसरत थी,
रैना"वक़्त ने हाथ मरोड़ दिया। रैना"
सूरज के मानिन्द ढलते जा रहे हैं,
अपने घर की ओर बढ़ते जा रहे हैं।
मेरे दोस्त भी हुये गिरगट के जैसे,
मतलब को रंग बदलते जा रहे हैं।
अपने अन्दर तो अन्धेरा ही रहा,
खंडर के चिराग जलते जा रहे है।
बेखबर हो गये अपने ही हाल से,
कहने को लोग सम्भलते जा रहे है। रैना"

Thursday, May 21, 2015

माँ तूने जब बुलाया,मैं दौड़ा चला आया,
आ के शीश झुकाया,तेरा दर्शन पाया।
अब तू भी फर्ज निभा माता,
तेरा दास बुलाये ----
आ माता घर आ माता,
सुखा बाग वीराना महका माता।
आ माता  घर ---------
जीवन की गाड़ी वैसे चलती तो जा रही,
पर कदम कदम पे  माँ अड़चन आ रही,
आ रास्ते से अवरोदक हटा माता ।
आ माता घर --------------रैना"
सुप्रभात जी ------------जय जय माँ
 कविता
            मैं कौन
मैं कौन मेरी औकात क्या है,
धर्म क्या मेरी जात क्या है।
अक्सर सोचता हूं तन्हा बैठ कर,
लेकिन ??????????
मेरे सवाल का जवाब मुझे अधूरा सा मिलता है,
जिससे मैं खुद को सन्तुष्ट नही कर पाता हूं,
अक्सर इस सवाल में मैं उलझ जाता हूं।
मैं सोचता यदि मेरी जात धर्म ये है,
फिर उसकी जात घर्म वो क्यों है।
जब हम दोनों का जिस्म एक ही मिट्टी से बना है,
पांच तत्व नभ जल थल अग्नि हवा जब अस्तित्व हमारा,
फिर कैसे हुआ मैं उससे अलग न्यारा।
फिर हमें किसने उलझाया है,
क्या उसने ही चक्कर चलाया है।
फिर मैं सोचता वो ऐसा चक्कर क्यों चलायेगा,
अपने बच्चों को आपस में क्यों लड़ायेगा।
 ये सब इंसान के खुरापाती दिमाग की पैदाइश है,
जिससे वो अक्सर करता रहता जोर आजमाइश है।
मेरी इस हरकत को देख कर वो मौन है,
वो भी मुझ से कहता है जान तू कौन है।
फिर वही सवाल मैं कौन हूं। रैना"



" SIYAASAT 
देखिये सियासत ने देश को किनारे कर दिया,
लोग धर्म जाति क्षेत्रवाद में उलझ कर रह गये। रैना"
उड़ती धूल देखते रह गये,
अरमानों के महल ढह गये।
दिल में आया सैलाब था,
आंसू बिन पूछे ही बह गये।
किस्मत का तोहफा समझ,
हम तो ये दर्द भी सह गये।
रैना"सोचते दिन रात हम,
क्यों वो अलविदा कह गये। रैना"

निखरे निखरे तुम लगते हो ये मशवरा किसका है,
लगता तुम भी जान गये जो दिखता वो बिकता है।
लगता तुम भी जान --------------------
आईना भी शरमा गया  होगा ऐसा है श्रृंगार किया,
खूब अदा से रेशमी जोड़ा बड़े चाव से पहन लिया,
बेशक इस भरी महफ़िल में तुझ सा कोई न दिखता है।
लगता तुम भी जान ---------------------
बदले इस अन्दाज ने तेरा रुतबा खास बनाया है,
तुम तो अब कोहनूर हुये मन चाह दाम पाया है,
उपमा भी अब बौनी हुई तेरे सामने कोई न टिकता है।
लगता तुम भी जान -----------------------
अपनी गरीबी को झूठ के जामे में छुपाना चाहिये
माल चाहे जैसा भी हो सिर्फ बेचना ही आना चाहिये,
रैना" खुद को बेच न पाया वैसे तो अच्छा लिखता है।
लगता तुम भी जान -----------------रैना"


इंसान को कुत्ता कह कर कुत्ते की तौहीन मत करना,
कुत्ता सूखी खा कर भी मालिक का दर नही छोड़ता,
इन्सान रिश्ते,वादें कसमें भूल ??????
जिधर चुपड़ी मिलती है उधर भाग लेता है। रैना"
जो दिल इश्क का बीमार हो गया,
वो शख्स दुनिया में बेकार हो गया.
इक शै बची थी खरीदो- फरोख्त से,
इश्क भी आजकल व्यापार हो गया.
खाक रखे वो दीन दुनिया की खबर,
तन्हाई से जिसको प्यार हो गया.
दो दिलों ने जब भी मिलना चाहा,
जमाना बीच में दीवार हो गया.
कोई तो घुमे है गर्दो -गुबार में,
कोई इश्क में गुले-गुलजार हो गया.
"रैना" औरों को देता रहा नसीहते,
खुद ही के इश्क में गिरफ्तार हो गया. रैना"

Wednesday, May 20, 2015

रिश्ता अब तन धन का है,
मीत न कोई मन का है,
बस्ती तो इन्सानों की,
कानून तो यहां वन का है। रैना"
माँ वैष्णो महारानी मैं आया तेरे द्वार,
माँ सिर्फ इक बार मेरी सुन ले पुकार,
दुःख दर्दों माँ गमों ने घेरा है,
जोड़ मन के तार माँ मेरा कर दे उद्धार। 
माँ वैष्णो महारानी ------------
अरमान टूट कर चूर चूर हो गये,
जो मन के मीत वो दूर दूर हो गये,
खुद पे भी अब न रहा एतबार। 
माँ वैष्णो महारानी --------रैना"
सुप्रभात जी -----------जय जय माँ 
 जीना चाहे सिर पे ये इल्जाम लेकर,
 लोग छेड़े मुझे तेरा नाम लेकर।
 तन मन इस कदर डूबे इश्क में तेरे,
साथ ले जाने को तू आये पैगाम लेकर।
रिंद मयकश की आखिरी ख्वाईश इतनी,
महबूब सामने बैठे हाथों में जाम लेकर।
अदालत में हर हाल हाजिरी भरनी हो,
जज पूछेगा क्या आये हो ईनाम लेकर।
रैना"सूफी इबादत करता इंसानों की,
रुखसत हो यहां से साथ रहीम राम लेकर। रैना"






दोस्तों ये ग़ज़ल पढ़ने के साथ सोचने के लिए है
दिन में ही स्याह काली रात होगी,
संग रहने वाली से जब बात होगी।
इक मुद्दत से बैठी वो इन्तजार में,
गले लगायेगी जब मुलाकात होगी।
जरा तरस न खायेगी वो मेरे हाल पे,
यूं आंखों से छम छम बरसात होगी।
जन्मों की प्यास मिटे पी मिल जाये,
क्या खूब हसीन ईद की रात होगी। 
कहने को तो छा जाये गुप अन्धेरा
सच रैना"तब ही नई परबात होगी। रैना"

Tuesday, May 19, 2015

गम हमें अफ़सोस यही दुःख देने वाला अपना हैं,
आंख खुलने से पहले ही टूटा हसीन वो सपना हैं,
जब भी खुशबू महकेगी नैना छम छम बरसेंगे,
जीवन भर फूल यादों के दिल में संभाले रखना है। रैना"
दोरतों मेरे मन की बात आप की नज़र है

रोने से कुछ भी नही हासिल इसलिये रोना छोड़ दिया,
बेशक जो सोता वो खोता हमने तभी सोना छोड़ दिया।
दाग दिल पे लगे कोई बात नही इक कोने में रख छोड़े,
बेवजह क्यों वक्त बर्बाद करे धागों को धोना छोड़ दिया।
मझदार मजे से पार करें साहिल पे ही किश्ती डूब जाये,
जब किस्मत ही अपनी ऐसी हमने दुखी होना छोड़ दिया।
महंगाई के इस दौर में साबुन पे खर्चा फिर क्यों करना,
चैन से सोते आंसुओं से अब तकिया भिगौना छोड़ दिया।
चार दिन की जिन्दगी थी रैना"दो दिन की बची बाकी है,
हंसते हंसाते मस्ती में भार गमों का ढोना छोड़ दिया। रैना" 
मेरी वैष्णो माता तेरे चमत्कार न्यारे है,
भक्तों को यहां मिलते माँ सच्चे सहारे है,
अपने भक्त मईया तूने भव पार उतारे है
हम ही वंचित रहे गये किस्मत के मारे है।
फूटे भाग्य हमारे हैं ----------------
तू जो करे कृपा मेरी बिगड़ी संवर जाये,
अभी तो ये हाल बनती बात बिगड़ जाये
टूट के धरती पर गिरे जो चमके तारे है।
फूटे भाग्य हमारे हैं ---------------
गम में उलझ कर रह गई मेरी जिंदगानी है,
हाये रो रो कर सुख गया आँखों का पानी है ,
अपनों ने ही वैष्णो माता कहर गुजारे है।
फूटे भाग्य हमारे हैं --------------रैना"
सुप्रभात जी ---------------जय जय माँ 
देख के अपने देश हालत भारत माता रो पड़ी,
झूठे के ऊँचे महल बने सच्चे की कच्ची झोपड़ी।
शहीद हुये कई जेल गये हंस हंस फांसी पे चढ़े,
वो मसीहा बने देश के जो थे शैतान खोपड़ी।
शराफत बैठी छम छम रोये इम्तहान में फेल है,
हर पेपर में पास हो गई शातिर चातुर लोमड़ी।
डिग्री हाथों में लिये मजबूर युवा दुःखी घूमते,
पैसे जिसकी जेब में देखो मिले उसे ही नौकरी।
बेअदबी हो रही बहुत दहेज की बलि भी चढ़ती,
ऐसे हालात में कोई बताये कैसे बचेगी छोकरी।
भारतीय नारी का अब भी बद से बदतर हाल है,
गोदी में बच्चा लिये सिर पर रखी फिरे टौकरी।
महंगाई के दौर में इन्सान बड़ा ही परेशान है,
दुखों का पहाड़ सहना जिन्दगी भी है दो घड़ी। रैना"
हुस्ने मलिका दिलचस्प सा किस्सा हो तुम,
बेशक फकीरों की इबादत का हिस्सा हो तुम।

तुम हसीं हो तेरी हर अदा कातिल है,
हुस्ने मलिका तू तारीफ के काबिल है।
तुम हसीं हो ----------------
कयामत ढाये बेमिसाल सादगी तेरी,
आशिक करते हैं फ़क़त बन्दगी तेरी,
हर फ़न में माहिर तू तो  कामिल है।
तुम हसीं हो -----------------
फ़िराग दिल होगा कोई मोहब्बत वाला

खुशनसीब होगा बड़ा ही किस्मत वाला,
जिसकी जिंदगी में सुमार तू शामिल है।
तुम हसीं हो ------------------
तुझसे मिलने की फरियाद तो करते है
तेरी याद में दीवाने उसका दम भरते है,
रैना"तो मझदार में भटके तू साहिल है।
तुम हसीं हो ---------------रैना"



मत पूछो क्या कमा रहे हैं,
अपना तो मंगलवार भी है ???????
रविवार जैसा।
अच्छे दिन आने की बात सुन,
जेब से भाग गया पैसा। रैना"




क्या खूब है ये जमाने वाले,
हंसते को सिर्फ रुलाने वाले,
क्या भरोसा करे किसी पर,
खुद भटके राह दिखाने वाले। रैना"


औकात से ज्यादा परों को तोला नही करते,
बात तौल के कहना ज्यादा बोला नही करते,

Monday, May 18, 2015

Friday, May 15, 2015

दिल में हल्का सा दर्द होने लगा है.
शायद कोई याद कर रोने लगा है।
हर तरफ अब उदासी छाने लगी है,
दिल के दाग भी कोई धोने लगा है।
कोई ख्वाबों के महल बना रहा है,
दुखी कोई होशो हवस खोने लगा है /
एहसास उसको भी होने लगा होगा,
रैना"अब लम्बी तान के सोने लगा है। रैना"