निसंदेह ये सियासतदानों का दौर है,
अब नेता के हाथ में ही सबकी डोर है।
कार्यालयों में उसकी ही तूती बोलती,
चम्मचा चुगल बेईमान जो कामचोर है।
रिश्वत लेंने वाला रिश्वत दे कर छूटता,
अब यहां चोरों पे अक्सर पड़ता चोर है।
जिसके हाथ में पैसा भैंस उसी की है,
बुरी गत उसकी जो गरीब कमजोर है।
चन्द्रमा का क्या रोज बिस्तर बदलता,
अपने हाल से दुखी बैठी रोती चकौर है।
रैना"अब दिन में कई रंग है बदलता,
प्रेम प्यार की बातें सिर्फ झूठा शौर है। रैना"
अब नेता के हाथ में ही सबकी डोर है।
कार्यालयों में उसकी ही तूती बोलती,
चम्मचा चुगल बेईमान जो कामचोर है।
रिश्वत लेंने वाला रिश्वत दे कर छूटता,
अब यहां चोरों पे अक्सर पड़ता चोर है।
जिसके हाथ में पैसा भैंस उसी की है,
बुरी गत उसकी जो गरीब कमजोर है।
चन्द्रमा का क्या रोज बिस्तर बदलता,
अपने हाल से दुखी बैठी रोती चकौर है।
रैना"अब दिन में कई रंग है बदलता,
प्रेम प्यार की बातें सिर्फ झूठा शौर है। रैना"
No comments:
Post a Comment