हो तेरी रहमत कुछ अलग कर जायेगे,
गर तुम न चाहोगे फिर तो मर जायेगे।
शाम ढलेगी जब स्याह काली रात होगी,
साथ न हुये जो तुम रैना" डर जायेगे। रैना"
गर तुम न चाहोगे फिर तो मर जायेगे।
शाम ढलेगी जब स्याह काली रात होगी,
साथ न हुये जो तुम रैना" डर जायेगे। रैना"
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