दोस्तों संडे स्पेशल
जितने ज्यादा भटकोगे,
उतने ज्यादा अटकोगे।
जितने ज्यादा चमकोगे,
उतने ज्यादा खटकोगे।
कुछ हासिल नही होगा,
बेवजह पैर ही पटकोगे।
इश्क मिजाजी दुःख देता,
फ़क़त सूली पे लटकोगे।
ये बुत कभी खुश न होते,
तुम और कितना मटकोगे।
रैना"दुखों का घर दुनिया,
तुम शीशे जैसे चटकोगे। रैना"
तुम सा कोई हमसफ़र नही मिलता,
तेरे घर जैसा कोई घर नही मिलता,
बैठ ले दो घड़ी जिसकी छाया के नीचे,
अफ़सोस कोई ऐसा शज़र नही मिलता। रैना"
जितने ज्यादा भटकोगे,
उतने ज्यादा अटकोगे।
जितने ज्यादा चमकोगे,
उतने ज्यादा खटकोगे।
कुछ हासिल नही होगा,
बेवजह पैर ही पटकोगे।
इश्क मिजाजी दुःख देता,
फ़क़त सूली पे लटकोगे।
ये बुत कभी खुश न होते,
तुम और कितना मटकोगे।
रैना"दुखों का घर दुनिया,
तुम शीशे जैसे चटकोगे। रैना"
तुम सा कोई हमसफ़र नही मिलता,
तेरे घर जैसा कोई घर नही मिलता,
बैठ ले दो घड़ी जिसकी छाया के नीचे,
अफ़सोस कोई ऐसा शज़र नही मिलता। रैना"
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