Wednesday, May 27, 2015

माँ बाप की सेवा में जो भी अपना ध्यान लगाते हैं,
मुक्त्त हो जाये बंधनों से जीवन भर वो सुख पाते हैं,
रैना" ये सच जान ले इन्सान में भगवान वास करे, 
किसी आम की बात नही यही चारो ग्रन्थ बताते हैं। रैना"

अर्श से टूट के गिरते तारें ये हमको समझाते हैं,
सम्भल के रहना जिंदगी में बुरे दिन भी आते हैं,
शौख से खिलते गुल जो गुलशन को महकते हैं,
वक़्त की जब मार पड़े वो गुल मुरझा जाते हैं,
टूटे पत्ते बिखरे जमीं पर अपना दुःख फरमाते हैं,
आंधियों से टकराने वाले हवा की ठोकरें खाते हैं। 
मिट्टी कहती मिट्टी से तू काये का गुमान करे,
तेरा मेरा रिश्ता सच्चा बाकी झूठे रिश्ते नाते हैं। 
रैना"इतना जान ले तू जब फ़रिश्तें लेने आते हैं,
बांधे रस्सी से किसी को वो पलकी पर बैठाते हैं। रैना"

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