Tuesday, May 19, 2015

देख के अपने देश हालत भारत माता रो पड़ी,
झूठे के ऊँचे महल बने सच्चे की कच्ची झोपड़ी।
शहीद हुये कई जेल गये हंस हंस फांसी पे चढ़े,
वो मसीहा बने देश के जो थे शैतान खोपड़ी।
शराफत बैठी छम छम रोये इम्तहान में फेल है,
हर पेपर में पास हो गई शातिर चातुर लोमड़ी।
डिग्री हाथों में लिये मजबूर युवा दुःखी घूमते,
पैसे जिसकी जेब में देखो मिले उसे ही नौकरी।
बेअदबी हो रही बहुत दहेज की बलि भी चढ़ती,
ऐसे हालात में कोई बताये कैसे बचेगी छोकरी।
भारतीय नारी का अब भी बद से बदतर हाल है,
गोदी में बच्चा लिये सिर पर रखी फिरे टौकरी।
महंगाई के दौर में इन्सान बड़ा ही परेशान है,
दुखों का पहाड़ सहना जिन्दगी भी है दो घड़ी। रैना"

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