टूटा मेरा दिल बिखरना बाकी है,
जिस्म से जान निकलना बाकी है।
सामां तो कब का ही बांध लिया है,
अपने घर की तरफ चलना बाकी है।
दिल पे लगे जख्म नासूर बन गये,
दर्द के मारो का तड़फ़ना बाकी है।
अश्कों का दरिया बहने लगे पल में,
गमगीन आंखों का छलकना बाकी है।
हो जानी है स्याह काली काली रैना",
निकला सूरज अभी ढलना बाकी है। रैना"
जिस्म से जान निकलना बाकी है।
सामां तो कब का ही बांध लिया है,
अपने घर की तरफ चलना बाकी है।
दिल पे लगे जख्म नासूर बन गये,
दर्द के मारो का तड़फ़ना बाकी है।
अश्कों का दरिया बहने लगे पल में,
गमगीन आंखों का छलकना बाकी है।
हो जानी है स्याह काली काली रैना",
निकला सूरज अभी ढलना बाकी है। रैना"
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