Saturday, May 30, 2015

तू मेरे वजूद में उतर न पायेगा,
मैं टूटा आइना तू सवंर न पायेगा।

इतना आसान नही किसी के वजूद में नजर आना,
शमा खुद को जलाती तभी गले लगता है परवाना।

बेहतर होगा तू बदली अपनी आदत कर ले,
उल्फ़त तेरा मिजाज नही सियासत कर ले।
दीवानों की होती है अपनी अलग दुनिया,
जहां जी चाह यार से गुफ्तगू इबादत कर ले।
हुस्न-ए-यार पे फ़िदा हो दिल कुर्बान कर दे,
दिल को करार मिले पाक मोहब्बत कर ले।
दोस्त का ख्याल नही दुश्मनों की चिन्ता,
वहां परेशां होगा जमा नाम की दौलत कर ले।
आशिकों की महफ़िल का यही दस्तूर रैना"
हरपल जामे नाम पीने की हिमाकत कर ले।  रैना" 

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