Friday, May 29, 2015


मिट्टी सोने की खद्दान से उठाई होगी,
ये मूरत तो खुदा ने खुद बनाई होगी।
घटाओं से मांगी होगी काली जुल्फें,
मस्ती आ कर आंखों में समाई होगी।
रंग भरा होगा इत्मीनान से बहारों ने,
नजारों ने फिर ये तस्वीर सजाई होगी।
सुर्खी सफेद माटी से खूब तैयार कर के,
फिर पाक रूह इस घर में बसाई होगी।
अंग अंग में मस्ती जान लेने वाली अदा,
देख कामनी भी घबराई शरमाई होगी।
काबिले तारीफ़ रैना" सूरत औ सीरत,
चमत्कार उसका हैरान ये खुदाई होगी। रैना"



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