मैं काली रैना सुबह का इन्तजार है,मेरा नसीब अँधेरे से मुझको प्यार है।
टूटे सितारें रात भर रोते हैं साथ में,
अपने घर में न कभी आनी बहार है।
अपना सफीना साहिल पे ही डूबता,
बाखूबी मझदार को कर लेता पार है।
ख़ुशी ने अब मेरा दामन छोड़ दिया,
गम मेरी जिन्दगी में हुआ सुमार है।
धोखा तो हमें देखिये किस्मत दे रही,
धोखेबाज वैसे न कोई मेरा यार है।
दीदारे यार की तलब चाहत है बहुत,
होगा सवेरा रैना"को यकीं एतबार है। रैना"
टूटे सितारें रात भर रोते हैं साथ में,
अपने घर में न कभी आनी बहार है।
अपना सफीना साहिल पे ही डूबता,
बाखूबी मझदार को कर लेता पार है।
ख़ुशी ने अब मेरा दामन छोड़ दिया,
गम मेरी जिन्दगी में हुआ सुमार है।
धोखा तो हमें देखिये किस्मत दे रही,
धोखेबाज वैसे न कोई मेरा यार है।
दीदारे यार की तलब चाहत है बहुत,
होगा सवेरा रैना"को यकीं एतबार है। रैना"
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