यार को चाहने वालो के अंदाज निराले होते हैं,
दीवानों के हाथों में जामे नाम प्याले होते हैं।
आशिक मस्त अदाओं पे दिलो जान लुटा देते,
मथुरा मक्का कांशी ओ मन में शिवाले होते है।
महबूब पे दिल फ़िदा हुआ अब करनी इबादत है,
हमने गोरों से क्या लेना मस्त प्यारे काले होते है।
इश्क की मुश्किल राहें तो जान ही निकाल लेती,
होठों पे पड़ते फ़फ़ोले हैं और पैरों में छाले होते हैं।
सब कुछ लुटा देते फिर भी करते न गिला कोई,
यार की रजा में राजी दीवाने तो मतवाले होते हैं।
देखे न महल किसी के अपनी झोपड़ी में मस्ती,
तन के चाहे वो हो काले पर मन में उजाले होते हैं।
अब लोग दीवाने पैसे के उल्फ़त से है दूर बहुत,
जो चुप रहे वो फेल हुये पास भौंकने वाले होते है।
मौलवी पादरी पुजारी और खद्दरदारी में फर्क नही,
नेता देश को लूटे धार्मिक संस्थानों में घोटाले होते है।
खेत का बचना मुश्किल जब बाड़ खेत को खाने लगे,
अब देश की बुरी हालत रैना"गद्दार रखवाले होते है।रैना"
दीवानों के हाथों में जामे नाम प्याले होते हैं।
आशिक मस्त अदाओं पे दिलो जान लुटा देते,
मथुरा मक्का कांशी ओ मन में शिवाले होते है।
महबूब पे दिल फ़िदा हुआ अब करनी इबादत है,
हमने गोरों से क्या लेना मस्त प्यारे काले होते है।
इश्क की मुश्किल राहें तो जान ही निकाल लेती,
होठों पे पड़ते फ़फ़ोले हैं और पैरों में छाले होते हैं।
सब कुछ लुटा देते फिर भी करते न गिला कोई,
यार की रजा में राजी दीवाने तो मतवाले होते हैं।
देखे न महल किसी के अपनी झोपड़ी में मस्ती,
तन के चाहे वो हो काले पर मन में उजाले होते हैं।
अब लोग दीवाने पैसे के उल्फ़त से है दूर बहुत,
जो चुप रहे वो फेल हुये पास भौंकने वाले होते है।
मौलवी पादरी पुजारी और खद्दरदारी में फर्क नही,
नेता देश को लूटे धार्मिक संस्थानों में घोटाले होते है।
खेत का बचना मुश्किल जब बाड़ खेत को खाने लगे,
अब देश की बुरी हालत रैना"गद्दार रखवाले होते है।रैना"
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