Sunday, May 24, 2015

दोस्तों सुनो संडे स्पेशल

मैं जब अपने अन्दर देखता हूं,
काला गहरा समुंदर देखता हूं।
अपनी हरकतों के बारे सोचता,
मैं जब भी कोई बन्दर देखता हूं।
दिल के अजीब मिजाज तो देखो,
 बिन मेहनत के नम्बर देखता हूं।
जब से महंगाई ने जोर पकड़ा है,
दिन में मुफ्त के लंगर देखता हूं।
चेहरे पर तो खिली मुस्कान देखू,
दोस्तों के हाथ में खंजर देखता हूं।
जमीं पे रहने वाले तो सभी बदले,
जमीन न बदला अंबर देखता हूं।
पैदा हुये बहुत नकल करने वाले,
बने फिरते स्वंभू पैगंबर देखता हूं।
रैना"तोड़ दे जो किस्मत का ताला,
मैं ऐसा करिश्माई हैम्बर देखता हूं। रैना"




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