मैं इस काबिल नही जो तारीफ़ हो मेरी,
राह के पत्थर सिर्फ ठोकरों के लिये होते हैं। रैना"
मां
जैसे शमा खुद को जला के बज्म को रोशन करे,
वैसे ही माँ खुद को तपाये गम सहे तिल तिल मरे।
घर को रोशन करे। …। …… रैना"
मैं इस काबिल नही जो तारीफ़ हो मेरी,
राह के पत्थर सिर्फ ठोकरों के लिये होते हैं। रैना"
हम भी चमके सितारे होते,
गर किस्मत के न मारे होते। रैना"
आंखो में तो इक जहान सा सजा रखा है,
दिल में फड़कता तूफ़ान सा दबा रखा है,
अब मुझको ज्यादा चिन्ता फ़िक्र नही है,
क्योंकि ये घर तो उसका घर बना रखा है। रैना"
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