दोरतों मेरे मन की बात आप की नज़र है
रोने से कुछ भी नही हासिल इसलिये रोना छोड़ दिया,
बेशक जो सोता वो खोता हमने तभी सोना छोड़ दिया।
दाग दिल पे लगे कोई बात नही इक कोने में रख छोड़े,
बेवजह क्यों वक्त बर्बाद करे धागों को धोना छोड़ दिया।
मझदार मजे से पार करें साहिल पे ही किश्ती डूब जाये,
जब किस्मत ही अपनी ऐसी हमने दुखी होना छोड़ दिया।
महंगाई के इस दौर में साबुन पे खर्चा फिर क्यों करना,
चैन से सोते आंसुओं से अब तकिया भिगौना छोड़ दिया।
चार दिन की जिन्दगी थी रैना"दो दिन की बची बाकी है,
हंसते हंसाते मस्ती में भार गमों का ढोना छोड़ दिया। रैना"
रोने से कुछ भी नही हासिल इसलिये रोना छोड़ दिया,
बेशक जो सोता वो खोता हमने तभी सोना छोड़ दिया।
दाग दिल पे लगे कोई बात नही इक कोने में रख छोड़े,
बेवजह क्यों वक्त बर्बाद करे धागों को धोना छोड़ दिया।
मझदार मजे से पार करें साहिल पे ही किश्ती डूब जाये,
जब किस्मत ही अपनी ऐसी हमने दुखी होना छोड़ दिया।
महंगाई के इस दौर में साबुन पे खर्चा फिर क्यों करना,
चैन से सोते आंसुओं से अब तकिया भिगौना छोड़ दिया।
चार दिन की जिन्दगी थी रैना"दो दिन की बची बाकी है,
हंसते हंसाते मस्ती में भार गमों का ढोना छोड़ दिया। रैना"
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