Friday, May 29, 2015



दोस्तों यदि फुर्सत हो तो जरूर पढ़ लेना 

तेरे घर का पता मिलता ही नही, हम भटक रहे परेशान बहुत,
किस बस्ती में तेरा ठिकाना है,इस शहर से हम अनजान बहुत। 
तेरे घर का पता -----------
कोई कहता मस्जिद में बैठा,कोई कहता बैठा मन्दिर में,
कोई कहता आसमान पे रहता,कोई कहता रहता समुंदर में,
तेरे चाहने वाले अब जाये कहाँ,ढोंगी करते हैं हैरान बहुत। 
तेरे घर का पता ------------
धर्म का कोई भी कर्म नही,सीधी सादी ठेकेदारी है,
सब अपना ही पेट पीट रहे,यहां हर कोई व्यापारी है,
याद कर लो ज्ञान की दो बातें,फिर चलती धर्म की दुकान बहुत। 
तेरे घर का पता --------------
देना प्यासे को घूंट पानी नही,साल में इक दिन छबील लगा देना,
खूब मंच सजा दिखाने को,राहगीरों को जबरदस्ती शर्बत पिला देना,
अब धर्म के ठेकेदार अख़बारों में करते हैं अपना गुणगान बहुत। 
तेरे घर का पता ---------------रैना"

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