Saturday, June 6, 2015

वैष्णो माँ के दर पे निरंतर रहमत बरस रही,
सिर्फ बदकिस्मत जिन्दगी ही तरस रही।
जो बदकिस्मत भी माँ के दर आ जाता है,
बदल जाता मुकद्दर मनोवांछित फल पाता है।
खुश रहता माँ का भक्त कभी परेशान नही होता,
उसका कभी कोई भी अधूरा अरमान नही होता।
रैना"तू भी माँ वैष्णो के चरणों से प्यार कर ले,
अपनी जिन्दगी को मस्त गुले गुलजार कर ले। रैना"
सुप्रभात जी ---------------------जय जय माँ 

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