Sunday, June 21, 2015

अपने पापा को समर्पित
मिटाते ही रहे मेरे जीवन के अंधेरे,
निःसंदेह खुदा का रूप हैं पापा मेरे।
जिंदगी के हर रंग में ढलना सिखाया,
खुद जले और मुझे चलना सिखाया।
अपने कई काम वो न जरूरी करते,
लेकिन मेरी हर ख्वाहिश पूरी करते।
ठंडी गर्म हवा से बचा के रखा है मुझे,
अपने सीने से लगा के रखा है मुझे।
सूरज ने कभी न मुझको जलाया है,
क्योकि मेरे सिर पे शज़र की छाया है।
रैना"ने जीवन को महका लिया है,
अपने पापा को  दोस्त बना लिया है। रैना"

No comments:

Post a Comment