तू बेवजह ही मौत का जिक्र न कर,
उसने आना उसका तो फ़िक्र न कर।
मुस्तक़िल सी बात कहना सीख ले,
बेहतर होगा इधर की तू उधर न कर।
चाहे बेहिचक छोड़ दे तू दामन मेरा,
यूं मेरे रकीबों की तरफ नजर न कर।
जमीं पे ही गिरते है ऊंचा उड़ने वाले,
तू देख चमकती मिट्टी को फ़ख़्र न कर
रैना"जिन्दगी का क्या कब ठहर जाये,
खुद को खुद से तो ऐसे बेखबर न कर। रैना"
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