आंखें उससे दो चार तो कर,
सच्चे मन से प्यार तो कर,
वो दुःख पीड़ा सब हर लेगा,
उस पे तू एतबार तो कर। रैना"
न उसकी तरफ से देरी है,
ये कमी तो सिर्फ तेरी है।
तू काये का गुमान करे,
जिस्म मिट्टी की ढेरी है।
तू उलझा मोह माया में,
जान आफ़त ने घेरी है।
ये माया ठगनी ठगती है,
क्यों सोचे तेरी न मेरी है। रैना"
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