Friday, June 12, 2015

हम चाह कर भी उन्हें भूला नही पाये,
ओर किसी को अपना बना नही पाये।
हर अक्श में उसका अक्श देखा कीये,
आंखों में किसी ओर को सजा नही पाये। रैना"


बेशक अब खुद से दूर बहुत है,
आज का इन्सां मजबूर बहुत है,
उसे भी रात भर नींद न आती,
जो शहर में  मशहूर बहुत है।रैना"
पर निकलते ही उड़ने लगते,
नादाँ इन्सां में फितूर बहुत है ,

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