Thursday, June 18, 2015

रूठा करते हैं बच्चें पर हम से माँ रूठी है,
इक आस बची थी बाकी वो भी अब टूटी है,
किस पे भरोसा हम विश्वास करले मईया,
ये दुनिया सारी मतलब की फरेबी झूठी है।
ऐसा तो कभी होता नही माँ रूठे बच्चों से,
अपना साथ हुआ ऐसा किस्मत जब फूटी है।
माँ वैष्णो महारानी रैना"पे कर नजरे कर्म,
फिर से माँ आबाद कर जो दुनिया मेरी लूटी है। रैना"

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