मैं ढलती शाम हूं मेरे बारे सोचा न करो,
फकीरों का रास्ता इस कद्र रोका न करो।
राहे उल्फ़त तो तलवार की धार के जैसी,
देख गम की बरसात तुम चौंका न करो।
अपने घर को झाड़ पोंछ कर साफ करना,
किसी के घर का कभी भी मौका न करो।
मस्त जिन्दगी जीने का इक आसान मंत्र ,
भूल कर भी किसी के साथ धोखा न करो।
छोटी छोटी बात का बुरा मान जाते हैं लोग,
मनमर्जी करने दो रैना"तुम टोका न करो। रैना"
फकीरों का रास्ता इस कद्र रोका न करो।
राहे उल्फ़त तो तलवार की धार के जैसी,
देख गम की बरसात तुम चौंका न करो।
अपने घर को झाड़ पोंछ कर साफ करना,
किसी के घर का कभी भी मौका न करो।
मस्त जिन्दगी जीने का इक आसान मंत्र ,
भूल कर भी किसी के साथ धोखा न करो।
छोटी छोटी बात का बुरा मान जाते हैं लोग,
मनमर्जी करने दो रैना"तुम टोका न करो। रैना"
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