दोस्तों के नाम इक ग़ज़ल
तेरे शहर में भटके हैं हम,हमें न सच्चा प्यार मिला,
मतलब को ही पास आये,अपना जो भी यार मिला।
देखे बहुत खिलते चेहरे, पर अन्दर से सब टूटे हैं,
कहने को जन्मों का बंधन,हर रिश्ता तार तार मिला।
सुन अज़ल तेरा सहारा है, कोशिश कर हम मिल जाये,
कई बार तुझको बुलाया है,हर बार हमें इन्कार मिला।
हादसें दिल के साथ हुये,टूटे शुक्र है बिखरे नही,
रैना"उसने भी तो रुलाया है,जिससे भी एतबार मिला। रैना"
तेरे शहर में भटके हैं हम,हमें न सच्चा प्यार मिला,
मतलब को ही पास आये,अपना जो भी यार मिला।
देखे बहुत खिलते चेहरे, पर अन्दर से सब टूटे हैं,
कहने को जन्मों का बंधन,हर रिश्ता तार तार मिला।
सुन अज़ल तेरा सहारा है, कोशिश कर हम मिल जाये,
कई बार तुझको बुलाया है,हर बार हमें इन्कार मिला।
हादसें दिल के साथ हुये,टूटे शुक्र है बिखरे नही,
रैना"उसने भी तो रुलाया है,जिससे भी एतबार मिला। रैना"
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