Tuesday, June 23, 2015

122 122 122 12


तेरी याद दुश्मन मेरी बन गई,
कभी 
हमें गम नही अब सजा दीजिये,
हमारी खता है क़ज़ा दीजिये। 
यही आरजू तू कभी 

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