उसको हम पे तरस न आया,
मांगा अमृत जहर थमाया।
अपनी भी हिम्मत है यारों,
हमने तोहफ़ा न ठुकराया।
जो किस्मत में वो ही मिलता,
हमने दिल को ये समझाया।
जिसको भूले मुद्दत गुजरी,
रात फिर वो सपने में आया।
झूठा वहम क्यों पाला रैना"
कुछ न अपना सब है पराया। रैना"
मांगा अमृत जहर थमाया।
अपनी भी हिम्मत है यारों,
हमने तोहफ़ा न ठुकराया।
जो किस्मत में वो ही मिलता,
हमने दिल को ये समझाया।
जिसको भूले मुद्दत गुजरी,
रात फिर वो सपने में आया।
झूठा वहम क्यों पाला रैना"
कुछ न अपना सब है पराया। रैना"
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