Wednesday, June 10, 2015

अब ओर न सता माता,
उलझी डोर सुलझा माता,
मैं रहता हूं परेशानी में,
परेशानी को दूर हटा माता।

विफ़ल हो रहे प्रयास मेरे,
कोई साधन नही पास मेरे,
मैं घबरा गया वैष्णो माता,
रुक रुक चलते हैं सांस मेरे।

माँ तुम चाहो तो दुःख कट जाये,
गम की बदली भी माँ छट जाये,
मन के आँगन में बहार आ जाये,
मेरी किस्मत भी पलट जाये।

आज मेरा इम्तहान है माता,
फ़क़त तेरा ही ध्यान है माता,
गर मैं पास हो गया परीक्षा में,
फिर रैना"तुझ पे कुर्बान है माता। रैना"
सुप्रभात जी -------जय जय माँ


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