Tuesday, June 9, 2015

चिन्ता फ़िक्र है मईया तुझे जमाने की,
कभी फुरसत निकालो मेरे घर आने की,
हम इक मुद्दत से आस लगाये बैठे हैं,
अपने घर को तेरा मंदिर बनाये बैठे है।
माँ वैष्णो महारानी अब ओर न देर करो,
मेरे घर में आकर माता रानी सवेर करो।
मैं अपनी माँ को पलकों पर ही बैठा लुगा,
बीच घर में मईया तेरा आसन सजा दुगा।
माँ दुःख तकलीफ़ कोई परेशानी न आने दुगा,
माँ इक बार आ जाओ फिर लौट के न जाने दुगा।
चाहे आज नही तो माँ दो चार दिन बाद सुन ले,
अपने सेवक रैना" की माँ मेरी फरियाद सुन ले। रैना"
सुप्रभात जी ---------------जय जय माँ

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