मस्जिद में मिले न मंदिर में,
वो मिलता मन के अंदर में,
खोज कर उसकी खोज करले,
मौज कर छुट्टी की मौज करले।
मौज कर छुट्टी की ------------
मस्जिद में तो मचा हुआ शोर है,
मंदिर में भी घंटियों का जोर है,
पागलों के जैसे तू भटक रहा है,
समझ ले झूठा फरेबी ये दौर है।
मिले न तलाश चाहे रोज करले।
मौज कर छुट्टी की ----------- रैना"
वो मिलता मन के अंदर में,
खोज कर उसकी खोज करले,
मौज कर छुट्टी की मौज करले।
मौज कर छुट्टी की ------------
मस्जिद में तो मचा हुआ शोर है,
मंदिर में भी घंटियों का जोर है,
पागलों के जैसे तू भटक रहा है,
समझ ले झूठा फरेबी ये दौर है।
मिले न तलाश चाहे रोज करले।
मौज कर छुट्टी की ----------- रैना"
No comments:
Post a Comment