Friday, June 5, 2015

मस्जिद में मिले न मंदिर में,
वो मिलता मन के अंदर में,
खोज कर उसकी खोज करले,
मौज कर छुट्टी की मौज करले।
मौज कर छुट्टी की ------------
मस्जिद में तो मचा हुआ शोर है,
मंदिर में भी घंटियों का जोर है,
पागलों के जैसे तू भटक रहा है,
समझ ले झूठा फरेबी ये दौर है।
मिले न तलाश चाहे रोज करले।
मौज कर छुट्टी की -----------  रैना"

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