आंखें में सपना सजने लगा है,
कोई मुझे अच्छा लगने लगा है।
उसका हसीन मासूम सा चेहरा,
मुझको निरन्तर ठगने लगा है।
मदहोशी का आलम कुछ ऐसा,
नाग इश्क का डसने लगा है।
पी मिलन की हसरत जवां है,
गीत मिलन का बजने लगा है।
पास रह के भी रख ली है दूरी,
जमाना मुझ पे हंसने लगा है।
रैना"के मन में है तेरा ठिकाना
तू कहीं और ही बसने लगा है। रैना"
कोई मुझे अच्छा लगने लगा है।
उसका हसीन मासूम सा चेहरा,
मुझको निरन्तर ठगने लगा है।
मदहोशी का आलम कुछ ऐसा,
नाग इश्क का डसने लगा है।
पी मिलन की हसरत जवां है,
गीत मिलन का बजने लगा है।
पास रह के भी रख ली है दूरी,
जमाना मुझ पे हंसने लगा है।
रैना"के मन में है तेरा ठिकाना
तू कहीं और ही बसने लगा है। रैना"
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