Friday, June 5, 2015

दर्द से रिश्ता पुराना है।

हमने हर हाल में मुस्कराना है,
दर्द से अपना रिश्ता पुराना है,
जीने की तो चाहत नही अपनी,
अफ़सोस मरने का न बहाना है। 
क्या करे गाना हुआ मुश्किल,
जीवन इक गमगीन तराना है।
हम है फालतू सामान के जैसे,
जिसे जल्दी ही घर से हटाना है।
मर्जे इश्क का इलाज नही कोई,
पर रफ्ता रफ्ता मौत ने आना है।
रैना" को मंजिल मिल गई होती,
अफ़सोस दीवार बना जमाना है। रैना"


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