Thursday, June 4, 2015

देश की भावी पीढ़ी को समर्पित

जीवन में ये रंग भरना बाकी है,
देश के लिये कुछ करना बाकी है।
देश के लिये अभी -------------
देश की भावी पीढ़ी सपनें सजा रही,
अपने अरमानों को पंख लगा रही,
निसंदेह इनका आगे बढ़ना बाकी है।
देश के लिये अभी ---------------
जात धर्म क्षेत्र की ये  दीवारें तोड़ कर,
नये सिरे से समीक्षा इनको जोड़ कर,
सिर्फ देश प्रेम का पाठ पढ़ना बाकी है।
देश के लिये अभी -----------------
मिल के करे प्रयास रैना" छट जायेगी,
सुबह की पहली किरण नजर आयेगी,
देश के गद्दारों से अभी लड़ना बाकी है।
देश के लिये अभी ----------रैना"

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